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आईना (The Mirror)

शब्दों से नहीं बल्कि चित्र से अपनी छबी प्रस्तुत करता है।

ये मुझसे तकरीबन सबकुछ कहता है,

लेकिन बहुत सारी उलझन में छोड़ देता है।

मैं आज मेरे जीवन के एक अहम हिस्से (आईने) से कुछ कहना चाहती हूं ,तो कुछ पूछना भी चाहती हूं।

मेरा प्यारा आईना!

तु रोज सुबह मुझसा है दिखता,

या ना जाने तु मुझे क्या माया है दिखता!

कभी बता मुझे क्युं तेरा जन्म हुआ?

जिस कार्य के लिए है तेरा जन्म हुआ,

क्या तु उसी कार्य की ही राह पर है चलता?


तेरा नाम एक है, लेकिन तेरे रूप अनेक है।

कुछ इन्सानो सा, अच्छा पारदर्शी है,तो

कुछ इन्सानो सा, कपटी प्रतिवर्ती (Reversible) भी है।

तेरा आभासी सा भाग मुझसे कहता है कि,

“तु देख अपना जिस्म कितना साफ है!”

लेकिन ये नहींं‌ बताता कि,” तेरी रूह कितनी पाक़ है!”

तेरा पारदर्शी भाग तो बड़ाही विचित्र सा है!

वो नहीं कुछ सुनता, नहीं कुछ भी कहता,

एकदम मूक-बधिर(dumb-deaf) सा है।

तुझ सा इस दुनिया में और कोई है भी नहीं,

जो मुझे मेरे रूप से रुबरु करे!

अब तु ही बता मैं अपने आप को कैसे देखु?

अपना सच्चा अस्तित्व कहां देखु?

अजीब है तेरा खेल ये सारा,

तु प्रतिबिंबित (reflect) करता सब सच है,

लेकिन दिखता सब कुछ उससे उल्टा है।


तु खुद तुझ जैसा नहीं है,

तो मैं तुझपे यकिन कैसे करूं?

तु गलत नहीं, शायद तेरे कार्य में कुछ कमी है।

हसते चहरों के पीछे छिपे भाव,

तु बयान नहीं कर सकता।

नकाब पहन कर, घड़ी के कांटों से अधिक आगे बढ़ने वाले युग को,तु सच्चा अस्तित्व नहीं दिखा सकता,

क्योंकि कोई तुझे देखना ही नहीं चाहता।

आज तो तेरा झूठ ही सबका सच है।

कैसे ढुंढू अब मैं अपने आप को तेरे इतने सारे रंगों में?

तेरी वो झूठी रोशनी की चकाचौंध की वजह से,

खो गई हूं माया की भीड़ में।


सिर्फ एक अहसान मुझ पर करदेना की,

अगली सुबह जब मैं अपनी आंखें खोलूं तो

मुझे मेरे असली अस्तित्व से मिला देना!

~Anjali Upadhyay

#self #reflection #love #introspection #realself #mirror

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