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सन सेट

दिन की मौत नज़दीक आ गई है, आसमान में खून के बादल उमड़ आए है अब आसमान से खून बरसेगा कुछ देर बाद दिन के जिस्म का सारा खून ख़त्म हो जाएगा और दिन मर जाएगा जिस्म ठंडा पड़ जाएगा उस दहकते दिन का साथ साथ वो जो खून बरसा था वो भी सुख जाएगा सियाह हो जाएगा, उसके बाद एक छोटी सी, कोमल सी, मासूम सी रात पैदा होगी! दिन से भेड़ियों की तरह शदीद नहीं है,रात नर्म है दिन सी दहकती नहीं है, रात ठंडी है रात बुद्ध सी शांत है यहां रात में हम चैन से प्यार कर सकते है, खुद से,तुम से, कुदरत से,सभी से प्यार कर सकते है कुछ नहीं, तो रात से प्यार करना है और जीना है उसी पल में रहना है जब हर रोज़ दिन मरता है तब हर रोज़ रात जन्म लेती है हर रोज़ जिंदगी पैदा होती है। ~ मुसाफ़िर

Photo by- Preeti Roy Chaudhary

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