• nathi nonsense

२१ वीं सदी के आदिमानव।

हम तकरीबन १००० सालों से इस पृथ्वी(Earth)पर जीवन जीते आए हैं।

बस आगे कुछ बढ़ा इतने सालों में तो वो सिर्फ समय है।

आज भी बड़ी सी दुनिया में छोटे छोटे पेड़ और मिट्टी के बने मकान है।

मामूली से काम कर के लोग गुजारा करते है।

यहां आसपास जो भी घटना(incident) घटती है, वो केवल लोगों की आपसी बातों से ही पता चलती है।

वो भी केवल कुछ ही इलाकों की घटनाएं होती है।

रोज सुबह ना कोई अखबार आता है ना ही टेलीविजन(TV) है।

अरे अभी तो बताया सिर्फ समय ही आगे बढ़ा है।

यहां कौन किसकी बेटी? किसका बेटा? किसकी पत्नी? किसका पति ? किसका भाई ? किसकी बहन ? किसकी माता? किसके पिता?

ये रिस्ते यहां कोई नाम से नहीं पहचानता।

सब इक ही जैसी रंग की चमड़ी(skin) का जिस्म(body) लिए जन्में है।

एक तरह की घास(grass) बदन पर लपेट कर घुमते है।

भाषाएं(languages) भी तकरीबन एक-समान ही बोली जाती है।

एकबार युं ही एक खबर के बारे में लोग एक-दूसरे से बातें कर रहे थे।

बस कुछ वक्त पहले ही ये कानों कानों में कहीं जाने वाली खबर आई ।एक व्यक्ति ने खबर पूरी तरह से सुनाई। खबर कुछ यूं थी, एक इलाके के पास लाश मिली थी एक का बदन कुछ लड़के सा था, वैसे ही एक दूसरी भी लाश मिली थी जिसका बदन लड़की सा था।

ये शारीरिक भेद भगवान ने ही दिया है। जिसका कोई आधार नहीं क्युकी यहां सब साधरण इन्सान बन कर ही रहते है।

वैसे उस खबर को लेकर कुछ कुछ लोगों का कहना है की, उन दोनों का बलात्कार हुआ था फिर कत्ल किया किसीने।

ऐसी खबर पहली बार ही सुनने में आयी है।

इस खराब कृत्य(deed) के पीछे क्या कारण हो सकता है ?

अब ये तो मानव प्रकृति है ।सभी मात्र कारण जान ने के पीछे ही समय व्यर्थ करते है।

समस्या के समाधान के लिए कोई सोचता ही कहां है?

किन्तु कारण मालूम पड़ेगा तभी समाधान मिलेगा!

कुछ कारण होने की संभावनाएं है, जैसे कि

उन‌ लोगों के कपड़े ?

लेकिन तमाम लोग एक ही तरह के घास लपेट कर घुमते है ।

उनका शारीरिक भेद?

लेकिन यहां तो लड़का और लड़की दोनों के साथ ये दुर्घटना हुई।

उनका जाति भेद?

लेकिन अभी तक तो किसी भी जाति का विभाजन ही नहीं हुआ।

अमीरी या गरीबी?

लेकिन यहां तो सब एक-दूसरे जैसी ही जिवन शैली से रहते है।

प्रान्त भेद?

लेकिन अभी तक जमीन पर ऐसी काल्पनिक लकीरें बनायी ही नहीं ।

सारी ही संभावनाओं का कोई अर्थ ही नहीं है यहां।

लगता है इन्सान की सोच में ही कुछ ग़लती है।

कोई भी अच्छा या बुरा कार्य करने का विचार सबसे पहले इन्सान के दिमाग में ही आता है।

वो विचार जब इन्सान उसके आचरण(behavior) में उतारता है तभी इन्सान अच्छा या बुरा कार्य करता है।

कार्य के पीछे कई उद्देश्य(purpose) हो सकते हैं, लेकिन वो कार्य करने वाले के दिमाग तक ही रहता है।

जब ये घटना बनकर लोगों के सामने आती है, तो लोग उसको अपनी विचार शक्ति जितना ही समझ पाते है।

और उस घटना को अपने विचार का रूप देकर दूसरे लोगों को बताते हैं।

इसी तरह एक घटना के अलग-अलग रूप बनते जाते हैं, जिनके असंख्य कारणों और समाधानों को साबित करने के लिए और सब लोग अपने विचारों को सही साबित करने लिए अपने ही झंडे लहराते रहते हैं।

~ ANJALI UPADHYAY

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