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Aadat

अँधेरे में जीने की आदत सी हे हमें, उजाला मत करना;बुझाने की आदत सी हे हमें।

खुश नही है हम अपनी कामयाबी से, इसीलिए तो दूसरों को गिरने की आदत सी है हमे।

बखूबी जानते है हम अपने ज़ख्मो पर मरहम लगना – मगर, औरो के ज़ख्मो को कुरेदने की आदत है हमे।

नही है सौ गलतिया गलतिया अपनी, मगर दूसरों की निकलने की आदत है हमे।

कहते है हम बड़ी शिद्द्त से ‘सबका मालिक एक’, फिर भी हिन्दू-मुसलमान करने की आदत है हमे।

प्यार और खुशियां जैसे कई सारे है रंग इस जहाँ में, पर सुर्ख बहाने की आदत है हमे।

यू तो कई सारे जानवर है इस दुनिया मे, मगर ‘इन्सान’ सुनने की आदत है हमे।

*PART OF THE PERFORMANCE SERIES OF MUKAMMAL 6.0 ( Check the details of the event here)

Written by: Shyam Sony

#habit #hindi #nazm #poem

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